मस्कट/वॉशिंगटन, 6 फरवरी 2026। मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम कूटनीतिक बैठक शुरू होने जा रही है।...
मस्कट/वॉशिंगटन, 6 फरवरी 2026।
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम कूटनीतिक बैठक शुरू होने जा रही है। यह बातचीत ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित की जा रही है, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य
इस वार्ता का प्रमुख उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़े विवाद को सुलझाना और दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाना है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु गतिविधियों पर स्पष्टता और नियंत्रण सुनिश्चित करे, जबकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
तनाव की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं। क्षेत्र में सैन्य तैनाती, प्रतिबंधों और जवाबी बयानों के कारण हालात और बिगड़े हैं। इसी बीच यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों पक्ष किसी बड़े टकराव से बचने के संकेत दे रहे हैं।
कौन-कौन से मुद्दे हो सकते हैं शामिल
- सूत्रों के अनुसार, बातचीत में
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम
- प्रतिबंधों में संभावित ढील
- क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा
- मध्य पूर्व में शांति बहाली
- जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि वह फिलहाल परमाणु मुद्दे तक ही बातचीत सीमित रखना चाहता है।
दुनिया की नजरें इस बैठक पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है और वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। वहीं, बातचीत विफल होने की स्थिति में क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच यह बैठक कूटनीति के जरिए समाधान खोजने की एक महत्वपूर्ण कोशिश मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह बातचीत सिर्फ औपचारिक संवाद बनकर रह जाती है या वास्तव में मध्य पूर्व में शांति की दिशा में कोई ठोस रास्ता खोलती है।
