भारत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ( NCRB) की Crime in In...
भारत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की Crime in India रिपोर्ट इन सवालों को और गंभीर बना देती है। NCRB के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि देश में हर दिन सैकड़ों महिलाएँ और लड़कियाँ “Missing Persons” के रूप में दर्ज की जा रही हैं, जो एक गहरी सामाजिक और सुरक्षा संकट की ओर इशारा करता है।
🔍 NCRB क्या कहती है?
NCRB भारत
सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाला आधिकारिक संस्थान है, जो हर साल देशभर में दर्ज अपराधों का
विस्तृत डेटा प्रकाशित करता है। इसकी Crime in India रिपोर्ट में Missing Persons, Kidnapping, Abduction और Human
Trafficking जैसे
मामलों के आंकड़े शामिल होते हैं।
NCRB की
हालिया रिपोर्टों के अनुसार:
·
हर
साल लाखों लोग गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराए जाते हैं
·
इनमें महिलाएँ और लड़कियाँ सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं
·
बच्चों
में भी लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक पाई जाती है
औसतन
देखें तो भारत में हर दिन सैकड़ों महिलाएँ
और लड़कियाँ गायब होने की रिपोर्ट में दर्ज होती हैं।
👩🦱 महिलाएँ और लड़कियाँ क्यों सबसे ज़्यादा प्रभावित?
NCRB के
आंकड़े यह साफ़ दिखाते हैं कि Missing Persons के मामलों में महिलाओं और लड़कियों की
हिस्सेदारी लगातार अधिक बनी हुई है। इसके पीछे कई कारण सामने आते हैं:
·
घरेलू हिंसा और पारिवारिक दबाव
·
कम उम्र में विवाह या जबरन रिश्ते
·
मानव तस्करी और अवैध रोजगार नेटवर्क
·
प्रेम संबंधों के कारण घर छोड़ना
·
शहरी क्षेत्रों में रोज़गार की तलाश में
असुरक्षित पलायन
कई
मामलों में महिलाएँ स्वयं घर छोड़ती हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मामले ऐसे भी होते हैं जिनमें अपहरण,
शोषण
या संगठित अपराध की आशंका रहती है।
👧 बच्चों में लड़कियाँ ज़्यादा क्यों गायब हो रही हैं?
NCRB के
अनुसार:
·
गायब
बच्चों में 12
से
18 वर्ष की लड़कियों की संख्या अधिक है
·
कई
मामले kidnapping या trafficking से जुड़े पाए जाते हैं
·
कुछ
मामलों में बाल श्रम, घरेलू
काम या यौन शोषण के संकेत मिलते हैं
यह
स्थिति बताती है कि बालिकाएँ सबसे ज़्यादा
असुरक्षित वर्गों में शामिल हैं।
📊 क्या सभी लोग मिल जाते हैं?
NCRB रिपोर्ट
यह भी बताती है कि:
·
बड़ी
संख्या में Missing Persons को
बाद में ट्रेस या रिकवर कर लिया जाता है
·
लेकिन हजारों महिलाएँ और लड़कियाँ आज भी लापता बनी हुई हैं
·
कई
मामलों में जांच वर्षों तक अधूरी रहती है
यानी
समस्या सिर्फ गायब होने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें वापस सुरक्षित
लाने की प्रक्रिया भी एक बड़ी चुनौती है।
🏙️ बड़े शहर, बड़ी समस्या
दिल्ली,
मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे महानगरों में:
·
रोज़ाना दर्जनों महिलाएँ और लड़कियाँ गायब होने की रिपोर्ट होती
है
·
शहरी
भीड़, झुग्गी बस्तियाँ और
असंगठित श्रम क्षेत्र अपराध को छिपने का मौका देते हैं
महानगरों
में यह समस्या और भी जटिल हो जाती है।
⚠️ यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं
हर
“Missing” केस के पीछे:
·
एक
टूटा हुआ परिवार
·
वर्षों
का इंतज़ार
·
और
अनिश्चित भविष्य छुपा होता है
महिलाओं
और लड़कियों का गायब होना सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि समाज,
सुरक्षा
और संवेदनशीलता की परीक्षा है।
🛡️ आगे क्या किया जाना चाहिए?
विशेषज्ञों
और सामाजिक संगठनों के अनुसार ज़रूरी कदम:
·
Missing Persons की FIR तुरंत
दर्ज हो
·
राज्यों
के बीच डेटा शेयरिंग मज़बूत हो
·
मानव
तस्करी पर सख़्त कार्रवाई
·
लड़कियों
की शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा
·
परिवार
और समाज में जागरूकता
✍️ निष्कर्ष
NCRB
के
आंकड़े चेतावनी हैं।
भारत में हर दिन सैकड़ों महिलाएँ और
लड़कियाँ गायब होना यह बताता है कि सुरक्षा व्यवस्था, सामाजिक ढांचे और जागरूकता—तीनों स्तरों पर अभी बहुत काम बाकी है।
यह
सिर्फ अपराध का मुद्दा नहीं, यह भारत की बेटियों के भविष्य का सवाल
है।
