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मेरठ के कपसाड़ गांव की घटना: कानून-व्यवस्था के दावों पर करारा तमाचा और एक माँ का अमर बलिदान

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद स्थित कपसाड़ गांव में घटी हृदय विदारक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न केवल एक जघ...

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद स्थित कपसाड़ गांव में घटी हृदय विदारक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि सरकार द्वारा किए जा रहे “बेहतर कानून-व्यवस्था” के दावों की कठोर परीक्षा भी है, जिसमें शासन-प्रशासन पूरी तरह असफल दिखाई देता है।

दिनदहाड़े जातिगत मानसिकता से ग्रसित अपराधियों द्वारा एक दलित मासूम बच्ची का अपहरण कर लिया जाना और उसे बचाने के प्रयास में उसकी माँ की गड़ासे से काटकर नृशंस हत्या कर दिया जाना, यह साबित करता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं और आम नागरिक कितना असुरक्षित।

दिनदहाड़े अपराध और माँ का अद्वितीय साहस
घटना के अनुसार, बच्ची का अपहरण खुलेआम किया गया। जब माँ ने अपनी बेटी को बचाने के लिए अपराधियों का सामना किया, तो उसने अपने प्राणों की परवाह नहीं की। वह माँ, जिसने ममता और साहस की मिसाल पेश की, अपराधियों की बर्बरता का शिकार बन गई।

एक माँ का इस तरह अपनी संतान की रक्षा करते हुए शहीद हो जाना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए शर्म और आत्ममंथन का विषय है।

प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्न
घटना के बाद प्रशासन की भूमिका और भी अधिक संदेह के घेरे में आ जाती है। गांव में बाहरी लोगों, सामाजिक संगठनों और मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाई जा रही है। इससे यह आशंका गहराती है कि कहीं न कहीं अपराधियों को संरक्षण देने या साक्ष्य दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि प्रशासन ईमानदार और संवेदनशील होता, तो उसकी पहली प्राथमिकता अपहृत बच्ची की सुरक्षित बरामदगी और अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी होती। लेकिन अब तक की कार्रवाई उदासीनता और निष्क्रियता को ही दर्शाती है।

दलितों और महिलाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल
यह घटना एक बार फिर बताती है कि दलित समाज, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, आज भी सबसे अधिक असुरक्षित हैं। SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम जैसे सख्त कानून होने के बावजूद ऐसे जघन्य अपराधों का होना यह दर्शाता है कि कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है।

जब एक माँ की जान चली जाती है और शासन-प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है, तो यह लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा पर सीधा प्रहार है।

सरकार और प्रशासन से स्पष्ट मांगें
इस अमानवीय घटना के बाद केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। सरकार और प्रशासन को ठोस और त्वरित कार्रवाई करनी होगी। प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं—

इस जघन्य अपराध में शामिल सभी आरोपियों के विरुद्ध हत्या, अपहरण एवं SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराते हुए कठोरतम दंड, जिसमें मृत्युदंड भी शामिल हो, सुनिश्चित किया जाए।

अपहृत मासूम बच्ची को बिना किसी देरी के सुरक्षित बरामद कर उसके परिवार को सौंपा जाए।

पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा, पर्याप्त आर्थिक मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।

मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, तो उस पर भी कठोर कार्रवाई हो।

मेरठ के कपसाड़ गांव की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता का आईना है। यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो यह संदेश जाएगा कि गरीब, दलित और कमजोर वर्गों का जीवन इस व्यवस्था में सुरक्षित नहीं है।

एक माँ ने अपनी बेटी को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। अब यह समाज, सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उसका बलिदान व्यर्थ न जाए और न्याय केवल दिखे नहीं, बल्कि होता हुआ भी दिखाई दे।
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