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📰 केंद्र–राज्य समन्वय पर ज़ोर, विकास परियोजनाओं और फंडिंग को लेकर बैठकों का दौर

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता देश में विकास की गति को और तेज़ करने के उद्देश्य से केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने पर व्यापक चर्चा श...

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

देश में विकास की गति को और तेज़ करने के उद्देश्य से केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में विकास परियोजनाओं, केंद्रीय फंडिंग, लंबित योजनाओं और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। इन बैठकों में बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण, शहरी विकास और ग्रामीण योजनाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है।


🏛️ उच्चस्तरीय बैठकों में क्या हुआ

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठकों में यह स्पष्ट किया गया कि योजनाओं की सफलता के लिए बेहतर तालमेल और पारदर्शिता आवश्यक है
इन बैठकों में:

  • केंद्र प्रायोजित योजनाओं की वर्तमान प्रगति की समीक्षा
  • राज्यों को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान और फंड रिलीज़ प्रक्रिया
  • परियोजनाओं में हो रही देरी के कारणों
  • तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं

पर विस्तार से चर्चा की गई।


💰 फंडिंग और बजट पर खास ध्यान

केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे फंड के उपयोग में पारदर्शिता और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें, ताकि विकास कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए। कई राज्यों ने केंद्र के सामने यह मुद्दा भी उठाया कि फंड जारी होने में देरी से ज़मीनी स्तर पर योजनाएं प्रभावित होती हैं

इसके जवाब में केंद्र ने भरोसा दिलाया कि योग्य परियोजनाओं को समय पर वित्तीय सहायता दी जाएगी और डिजिटल निगरानी प्रणाली के ज़रिये फंडिंग प्रक्रिया को और तेज़ किया जाएगा।


🛣️ किन क्षेत्रों पर है सबसे अधिक फोकस

बैठकों में जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई, उनमें शामिल हैं:

  • 🚧 इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, रेल, मेट्रो और औद्योगिक कॉरिडोर
  • 🏥 स्वास्थ्य सेवाएं: मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
  • 🎓 शिक्षा: स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट
  • 🌾 कृषि और ग्रामीण विकास: सिंचाई, ग्रामीण सड़कें, किसान सहायता योजनाएं
  • 🏙️ शहरी विकास: स्मार्ट सिटी और आवास परियोजनाएं

🗣️ राज्यों की मांग और सुझाव

कई राज्यों ने केंद्र सरकार से लचीलापन और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां भिन्न होती हैं, इसलिए योजनाओं का क्रियान्वयन भी उसी अनुसार होना चाहिए।


📈 सरकार का उद्देश्य

केंद्र सरकार का मानना है कि मजबूत केंद्रराज्य सहयोग से ही देश की विकास योजनाएं ज़मीन पर प्रभावी ढंग से उतर सकती हैं। सरकार का लक्ष्य है कि:

  • परियोजनाओं में देरी कम हो
  • सार्वजनिक धन का सही और प्रभावी उपयोग हो
  • आम जनता तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचे

📝 निष्कर्ष

केंद्रराज्य समन्वय को लेकर चल रही यह बैठकें आने वाले समय में देश की विकास रफ्तार को नई दिशा देने वाली मानी जा रही हैं। यदि योजनाएं तय समय में पूरी होती हैं और फंडिंग प्रक्रिया सुचारू रहती है, तो इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा।