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भारत की खेल नीति: स्वस्थ राष्ट्र और सशक्त युवाओं की नींव

खेल किसी भी देश के लिए केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि वे स्वास्थ्य , अनुशासन , नेतृत्व और राष्ट्रीय गौरव का आधार होते हैं। भारत जैस...

खेल किसी भी देश के लिए केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि वे स्वास्थ्य, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रीय गौरव का आधार होते हैं। भारत जैसे युवा देश में खेल नीति का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी सोच के साथ भारत सरकार ने समय-समय पर राष्ट्रीय खेल नीति बनाई और उसमें सुधार किए, ताकि खेलों को जन-आंदोलन बनाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रदर्शन बेहतर हो।


खेल नीति की आवश्यकता क्यों?

भारत की बड़ी आबादी युवा है, लेकिन लंबे समय तक खेलों को करियर के रूप में सीमित अवसर मिले। खेल नीति का उद्देश्य रहा है:

·        युवाओं को नशा और अस्वस्थ जीवनशैली से दूर रखना

·        खेलों को शिक्षा से जोड़ना

·        ग्रामीण और शहरी प्रतिभाओं को समान अवसर देना

·        भारत को खेल महाशक्ति बनाना


भारत की प्रमुख खेल नीतियाँ

राष्ट्रीय खेल नीति 1984

यह भारत की पहली संगठित खेल नीति थी। इसमें स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने, खेल संघों को मान्यता देने और बुनियादी ढाँचे के विकास पर ज़ोर दिया गया।

राष्ट्रीय खेल नीति 2001

इस नीति में प्रतिभा खोज, खेल अकादमियों की स्थापना, कोचिंग व्यवस्था और निजी क्षेत्र की भागीदारी को महत्व दिया गया। खेलों को पेशेवर दृष्टिकोण से देखने की शुरुआत यहीं से हुई।

राष्ट्रीय खेल विकास संहिता 2011

इसका उद्देश्य खेल महासंघों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन लाना था। खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा और संघों के चुनावी नियम तय किए गए।

राष्ट्रीय खेल नीति 2023

यह आधुनिक और दूरदर्शी नीति है, जिसमें खेल, शिक्षा और रोज़गार को एक साथ जोड़ा गया है। इसमें खेल विज्ञान, तकनीक, डेटा विश्लेषण, पारंपरिक खेलों और खेल पर्यटन को विशेष महत्व दिया गया है।


युवाओं और शिक्षा में खेल

नई खेल नीति के तहत:

·        स्कूलों में खेल अनिवार्य किए जा रहे हैं

·        फिट इंडिया मूवमेंट के ज़रिए जन-जागरूकता

·        खेलो इंडिया कार्यक्रम से छात्र स्तर पर प्रतियोगिताएँ

·        विश्वविद्यालयों और खेल अकादमियों को मज़बूती


खिलाड़ियों के लिए योजनाएँ और प्रोत्साहन

·        खेलो इंडिया योजना

·        टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS)

·        अर्जुन, द्रोणाचार्य और खेल रत्न पुरस्कार

·        अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण


पारंपरिक और स्वदेशी खेलों को बढ़ावा

भारत की खेल नीति अब कबड्डी, खो-खो, मल्लखंभ, योग, गिल्ली-डंडा और पारंपरिक मार्शल आर्ट्स जैसे खेलों को संरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर केंद्रित है। इससे सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित होती है।


महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान

·        महिला खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्ति और सुरक्षा

·        पैरा-स्पोर्ट्स अकादमियाँ

·        समान अवसर और सम्मान


निष्कर्ष

भारत की खेल नीति अब केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह स्वस्थ समाज, अनुशासित युवा और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का माध्यम बन चुकी है। यदि इस नीति को ज़मीनी स्तर पर पूरी ईमानदारी से लागू किया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व खेल मंच पर एक मजबूत शक्ति बन सकता है।

खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, राष्ट्र निर्माण का माध्यम हैं।