प्रारंभिक जांच में 53 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की पुष्टि, यूनिवर्सिटी ब्लैकलिस्ट हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी एक...
प्रारंभिक जांच में 53 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की पुष्टि, यूनिवर्सिटी ब्लैकलिस्ट
हापुड़।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी एक बड़े सरकारी छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपों में फंस गई है। जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ने सामान्य वर्ग के छात्रों को अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में दर्शाकर करोड़ों रुपये की सरकारी छात्रवृत्ति का गलत लाभ उठाया।
जांच में करीब 53 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। इसके बाद प्रशासन ने मोनाड यूनिवर्सिटी को सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। साथ ही, राशि की रिकवरी और यूनिवर्सिटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है।
90 प्रतिशत मामले फर्जी पाए गए
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार के अनुसार, पिछले वर्ष छात्रवृत्ति वितरण की रूटीन जांच के दौरान मोनाड यूनिवर्सिटी में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद वर्ष 2013 से 2025 के बीच के मामलों को रैंडम आधार पर जांच के लिए चुना गया।
जांच में पाया गया कि करीब 90 प्रतिशत छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति के मामले फर्जी हैं। कुल 53 करोड़ रुपये की राशि में से लगभग 50 करोड़ रुपये अनुसूचित जाति वर्ग की छात्रवृत्ति और 3 करोड़ रुपये सामान्य वर्ग की छात्रवृत्ति बताई गई है।
SIT की रिपोर्ट के बाद सख्त कार्रवाई
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। SIT ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पात्रता मानकों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से छात्रवृत्ति का दुरुपयोग किया।
रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने मोनाड यूनिवर्सिटी को छात्रवृत्ति योजना से ब्लैकलिस्ट करने के आदेश दिए।
इसके तहत अब मोनाड यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत कोई भी छात्र सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले सकेगा। साथ ही, 53 करोड़ रुपये की रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी और यूनिवर्सिटी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
150 करोड़ तक जा सकता है घोटाले का आंकड़ा
समाज कल्याण विभाग का अनुमान है कि यह मामला अभी शुरुआती स्तर पर है। यदि पिछले 10 वर्षों की छात्रवृत्ति की गहन और पूर्ण जांच की गई, तो घोटाले की राशि 150 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकती है।
कुलपति ने आरोपों से किया इनकार
इस पूरे मामले पर मोनाड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मोहम्मद जावेद ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें यूनिवर्सिटी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और न ही समाज कल्याण विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई नोटिस प्राप्त हुआ है।
डॉ. जावेद के अनुसार, यूनिवर्सिटी में सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित की जाती हैं।
पहले भी विवादों में रही है यूनिवर्सिटी
गौरतलब है कि मोनाड यूनिवर्सिटी पहले भी फर्जी डिग्री और मार्कशीट बिक्री, शिक्षा माफिया नेटवर्क और यूनिवर्सिटी मालिक सहित 12 लोगों की गिरफ्तारी जैसे गंभीर मामलों में जांच का सामना कर चुकी है।
छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपों ने एक बार फिर यूनिवर्सिटी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
